February 27, 2021

India should head to London climate talks with a definitive plan of action: Rajan | क्लाइमेट चेंज में कोई भी देश अकेले बदलाव नहीं ला सकता, भारत को बेहतर प्रस्ताव के साथ आगे आना चाहिए

India should head to London climate talks with a definitive plan of action: Rajan | क्लाइमेट चेंज में कोई भी देश अकेले बदलाव नहीं ला सकता, भारत को बेहतर प्रस्ताव के साथ आगे आना चाहिए
India should head to London climate talks with a definitive plan of action: Rajan | क्लाइमेट चेंज में कोई भी देश अकेले बदलाव नहीं ला सकता, भारत को बेहतर प्रस्ताव के साथ आगे आना चाहिए


  • Hindi News
  • Business
  • India Should Head To London Climate Talks With A Definitive Plan Of Action: Rajan

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली8 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
रघुराम राजन का कहना है कि भारत को अपने हित क्लाइमेट एक्टिविस्ट्स की बात सुननी चाहिए और वैश्विक कार्रवाई के लिए दबाव बनाना चाहिए। - Dainik Bhaskar

रघुराम राजन का कहना है कि भारत को अपने हित क्लाइमेट एक्टिविस्ट्स की बात सुननी चाहिए और वैश्विक कार्रवाई के लिए दबाव बनाना चाहिए।

  • क्लाइमेट चेंज को लेकर इस साल लंदन में होगी सभी देशों की बैठक
  • अमेरिका का बाइडेन प्रशासन क्लाइमेट चेंज पर काम करने को तैयार

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में अप्रत्याशित आग लग रही है। अफ्रीका के सब-सहारा रेगिस्तान में सूखे की समस्या बढ़ रही है। इन घटनाओं से प्रतीत होता है कि क्लाइमेट चेंज की समस्या एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ रही है। भारत भी क्लाइमेट चेंज के सबसे खतरे वाले देशों में शामिल हैं। यह हमारे हित में है कि हम अपने क्लाइमेट एक्टिविस्ट्स की बात सुनें और वैश्विक कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपने ताजा कॉलम में यह बात कही है।

कोई अकेला देश बदलाव नहीं ला सकता

राजन का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर कोई भी अकेला देश बदलाव नहीं ला सकता है। वैश्विक स्तर पर सहयोगी कार्रवाई के माध्यम से ही बदलाव संभव है। बाइडेन प्रशासन के इस दिशा में काम करने को तैयार होने से उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल लंदन में क्लाइमेट को होने वाली बातचीत में महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। राजन का कहना है कि एक उभरते हुए बाजार के तौर पर क्लाइमेट चेंज को लेकर भारत को एक बेहतर प्रस्ताव के साथ लंदन जाना चाहिए। यह प्रस्ताव औद्योगिक दुनिया के लिए भी अच्छा होना चाहिए।

टैक्स लगाने के पक्ष में अधिकांश अर्थशास्त्री

राजन के मुताबिक, अधिकांश अर्थशास्त्री सामान्य तौर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए टैक्स लगाने के समर्थन में हैं। लेकिन डिजाइन के हिसाब से इन टैक्सों में जो बदलाव होता है, वह शॉर्ट टर्म में नुकसानदायक हो सकता है। इसका मतलब यह है कि किसी भी जल्द से जल्द कार्बन टैक्स लगाने को लेकर होने वाली बातचीत में कई देश टैक्स से बच जाएंगे और पारदर्शिता की समस्या पैदा होगी। अमेरिका जैसे औद्योगिक देशों की यह चिंता होगी कि विकासशील देश कार्बन टैक्स से मुक्त होंगे और वे लगातार उत्सर्जन करते रहेंगे। 2017 में भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 1.8 टन था। जो उस समय अमेरिका में प्रति व्यक्ति 16 टन और सऊदी अरब में 19 टन था।

उत्सर्जन कम करने के लिए कम खर्चीला तरीका अपनाना होगा

RBI के पूर्व गवर्नर का कहना है कि उत्सर्जन में कमी लाने के लिए सबसे कम खर्चीला तरीका अपनाना चाहिए और सबको समान इंसेंटिव दिया जाना चाहिए। इसके तहत भारत को अब और कोल प्लांटों का निर्माण नहीं करना चाहिए। जबकि यूरोप को अपने मौजूदा कोल प्लांटों को बंद कर देना चाहिए। तो बड़ा सवाल यह है कि जिस दुनिया में हम रहते हैं, उसे बचाते हुए हम इन चिंताओं को कैसे संतुलित करते हैं।

इसका आर्थिक समाधान काफी सरल है

राजन के मुताबिक, प्रति टन कार्बन लेवी या ग्लोबल कार्बन रिडक्शन इंसेंटिव (GCRI) इसका सबसे सरल आर्थिक समाधान है। जो भी देश प्रति व्यक्ति वैश्विक औसत 5 टन से ज्यादा का कार्बन उत्सर्जन करते हैं उन्हें ग्लोबल इंसेंटिव फंड में भुगतान करना चाहिए। इस वार्षिक भुगतान की गणना उस देश की आबादी द्वारा पैदा किए जा रहे अतिरिक्त उत्सर्जन को गुणा करके की जानी चाहिए। यदि 10 डॉलर प्रति टन के हिसाब से GCRI शुरू किया जाता है तो अमेरिका को हर साल 36 बिलियन डॉलर करीब 2.6 लाख करोड़ रुपए और सउदी अरब को 4.6 बिलियन डॉलर करीब 33 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

भारत को 3 लाख करोड़ रुपए का इंसेंटिव मिलेगा

राजन का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत वैश्विक औसत से कम कार्बन उत्सर्जन पैदा करने वाले देशों को इंसेंटिव मिलेगा। इसमें युगांडा को 2.1 बिलियन डॉलर करीब 15 हजार करोड़ रुपए और भारत को 41.6 बिलियन डॉलर करीब 3 लाख करोड़ रुपए हर साल मिलेंगे। यह देश इस पैसे का इस्तेमाल कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ाने में इस्तेमाल कर सकेंगे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed