April 23, 2021

FATF Pakistan| all you need to know About Financial Action Task Force (FATF) and Pakistan Position | पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होगा या ग्रे लिस्ट में ही रहेगा, 38 मेंबर्स आज करेंगे फैसला; जानिए सब कुछ

FATF Pakistan| all you need to know About Financial Action Task Force (FATF) and Pakistan Position | पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होगा या ग्रे लिस्ट में ही रहेगा, 38 मेंबर्स आज करेंगे फैसला; जानिए सब कुछ
FATF Pakistan| all you need to know About Financial Action Task Force (FATF) and Pakistan Position | पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होगा या ग्रे लिस्ट में ही रहेगा, 38 मेंबर्स आज करेंगे फैसला; जानिए सब कुछ


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पेरिस/इस्लामाबाद18 मिनट पहले

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फ्रांस के पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की अहम मीटिंग चल रही है। चार दिन की यह मीटिंग 21 फरवरी को शुरू हुई थी। आज अंतिम दिन है। नजरें इस बात पर हैं कि टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली यह संस्था पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करती है या उसे कुछ और वक्त देते हुए ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला करती है। कुछ घंटे में तस्वीर साफ हो जाएगी।

बहरहाल, पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में रहता है तो भी उसके सामने दिक्कतें बढ़ेंगी। और अगर ब्लैक लिस्ट हो गया तो इमरान सरकार और उनकी रहनुमाई कर रही फौज पर मुसीबतों का पहाड़ टूटना तय हो जाएगा। यहां FATF से जुड़ी जरूरी बातें जानते हैं।

क्या है FATF
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को संक्षिप्त रूप में FATF कहा जाता है। 1989 में दुनिया की सात आर्थिक महाशक्तियों (G7) ने इसकी स्थापना की थी। 38 देश इसके सदस्य हैं। फ्रांस के पेरिस में इसका हेडक्वॉर्टर है। यह संस्था आतंकवाद या हिंसा फैलाने वाले गुटों की फंडिंग और फाइनेंस से जुड़े मामलों पर नजर रखती है। मोटे तौर पर FATF की क्लीन चिट के बाद ही दुनिया के बड़े आर्थिक संगठन जैसे वर्ल्ड बैंक या IMF किसी देश को कर्ज या आर्थिक सहायता देते हैं। कई बार ब्याज दरें भी FATF की रिकमंडेशन्स के आधार पर तय की जाती है।

क्या है ब्लैक और ग्रे लिस्ट
इस मामले में एक रोचक तथ्य यह है कि FATF की टर्मिनालॉजी में ब्लैक या ग्रे लिस्ट जैसे शब्द ही नहीं हैं। दरअसल, जिस देश पर सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं, उसे सामान्य तौर पर ब्लैक लिस्ट कहा जाता है। जिस मुल्क पर थोड़े कम सख्त प्रतिबंध लगते हैं या जो वॉच लिस्ट में होता है उसे ग्रे लिस्ट में माना जाता है।

ब्लैक और ग्रे लिस्ट में होने के मायने
अगर अपने एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स के आधार पर FATF को यह लगता है कि कोई देश आतंकी गुटों पर निर्णायक और सबूतों के साथ कार्रवाई नहीं कर रहा है तो उस देश को ब्लैक लिस्ट किया जाता है। ब्लैक लिस्ट होने के बाद संबधित देश को दुनिया के किसी भी आर्थिक संगठन जैसे वर्ल्ड बैंक, IMF, एशियन डेवलपमेंट बैंक और EU से किसी तरह के लोन नहीं मिल सकते।

ग्रे लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है जिन पर शक होता है कि वे आतंकवादी गुटों या संगठनों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। मोटे तौर पर ग्रे लिस्ट का मतलब सख्त निगरानी से है। इसके लिए FATF शर्तें रखता है और संबंधित देश को तय वक्त में इन्हें पूरा करना होता है। FATF मैदानी हकीकत जानने के लिए टीम भेजती है।

पाकिस्तान दूसरी बार ग्रे लिस्ट में
पाकिस्तान तीन साल से ग्रे लिस्ट में है। 2018 में उसे इस लिस्ट में रखा गया था। FATF ने पिछले साल उसे 23 पॉइंट का एक प्रोग्राम सौंपा था। संगठन ने कहा था कि न सिर्फ इन शर्तों को पूरा करना है बल्कि, इसके पुख्ता सबूत भी देने होंगे। इमरान सरकार की कार्रवाई से FATF संतुष्ट नहीं है।
पाकिस्तान 2012 में पहली बार ग्रे लिस्ट में रखा गया। तीन साल बाद 2015 में इस लिस्ट से हटा। 2018 में फिर उसके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले और तब से अब तक वो ग्रे लिस्ट में है।

27 में से 21 शर्तें ही पूरी कीं
FATF के चेयरमैन मार्क्स पेलर के मुताबिक- पाकिस्तान को टेरर फंडिंग की जांच करने की जरूरत है। पाकिस्तान ने 27 में से 21 पॉइंट्स को पूरा किया है। बाकी 6 पॉइंट्स बेहद गंभीर हैं, जिस पर काम करने की जरूरत है। सरकार को इन पॉइंट्स को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। इन्हें पूरा करने की समय-सीमा खत्म हो गई है। पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक सभी प्लान को पूरा करने के लिए कहा गया है।



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