February 27, 2021

Big Blow To Nepal PM KP Sharma Oli; Supreme Court Announces Decision To Dissolve Parliament | सुप्रीम कोर्ट ने नेपाली संसद भंग करने का फैसला रद्द किया, कहा- 13 दिन में हाउस का सेशन बुलाएं

Big Blow To Nepal PM KP Sharma Oli; Supreme Court Announces Decision To Dissolve Parliament | सुप्रीम कोर्ट ने नेपाली संसद भंग करने का फैसला रद्द किया, कहा- 13 दिन में हाउस का सेशन बुलाएं
Big Blow To Nepal PM KP Sharma Oli; Supreme Court Announces Decision To Dissolve Parliament | सुप्रीम कोर्ट ने नेपाली संसद भंग करने का फैसला रद्द किया, कहा- 13 दिन में हाउस का सेशन बुलाएं


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काठमांडू16 मिनट पहले

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संसद भंग करने के फैसले के खिलाफ नेपाली सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग 12 पिटीशन फाइल हुई थीं। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच इस पर सुनवाई कर रही थी। - Dainik Bhaskar

संसद भंग करने के फैसले के खिलाफ नेपाली सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग 12 पिटीशन फाइल हुई थीं। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच इस पर सुनवाई कर रही थी।

नेपाल में कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने ओली के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने 20 दिसंबर को संसद के प्रतिनिधि सभा भंग करने की घोषणा की थी। कोर्ट ने प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही 13 दिनों के भीतर 275 सांसदों वाले हाउस का सेशन बुलाने का आदेश दिया है। अब ओली को संसद में बहुमत साबित करना होगा। उनके लिए ऐसा कर पाना मुश्किल है, क्योंकि पार्टी के ज्यादातर सांसद ओली के खिलाफ हैं।

संसद भंग करने के फैसले के खिलाफ नेपाली सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग 13 पिटीशन फाइल हुई थीं। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक बेंच इस पर सुनवाई कर रही थी। चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सोमवार को फैसला सुनाया। पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान न्याय मित्र की ओर से पेश 5 वकीलों ने कहा था कि सदन को भंग करने का प्रधानमंत्री ओली का फैसला असंवैधानिक था।

पिछले साल 20 दिसंबर को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद भंग करने की सिफारिश को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने पिछले साल 20 दिसंबर को मंजूरी दे दी थी। उन्होंने दो चरणों में चुनाव कराने का ऐलान किया था। इस दौरान नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर लीडर पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के खेमे के 7 मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया था। दहल लगातार ओली पर इस्तीफे के लिए दबाव बना रहे थे।

संसद भंग करने के पीछे की वजह

  • ओली अपनी ही पार्टी में लीडरशिप की चुनौती से जूझ रहे थे। उनके ऊपर पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री का पद छोड़ने का दबाव बढ़ता जा रहा था। उन पर संवैधानिक परिषद अधिनियम से जुड़े एक ऑर्डिनेंस को वापस लेने का दबाव था। इसे उन्होंने पिछले साल 15 दिसंबर को जारी किया था। उसी दिन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उसे मंजूरी दे दी थी।
  • इसके बाद से अपनी पार्टी के विरोधी नेताओं के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल और माधव नेपाल ओली पर दबाव बना रहे थे। इस ऑर्डिनेंस के बाद प्रधानमंत्री को संवैधानिक नियुक्तियों में संसद और विपक्ष की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। ओली की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपति से अध्यादेश वापस लेने की अपील की थी।
  • सांसदों ने संसद का विशेष अधिवेशन बुलाने के लिए राष्ट्रपति के पास आवेदन किया था। इसके बाद समझौता हुआ कि सांसद अधिवेशन बुलाने का आवेदन वापस लेंगे और ओली अध्यादेश वापस लेंगे। लेकिन, ओली ने इसकी जगह संसद भंग करने की सिफारिश कर दी थी।





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